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Sunday, 8 July 2012

किंगफिशर की मुंबई और गोवा की जमीनें बिकेंगी............

मुंबई।। किंगफिशर एयरलाइंस को कर्ज देने वाले बैंकों ने गुरुवार को कंपनी की मुंबई और गोवा की 120 करोड़ रुपये की दो परिसंपत्तियां बेचने का संकेत दिया है। इसके लिए 17 बैंकों के कंसोर्टियम ने एचडीएफसी सिक्युरिटीज को इन दो परिसंपत्तियों के मूल्यांकन का जिम्मा सौंपा है। इन बैंकों का किंगफिशर पर 7,500 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। हालांकि किंगफिशर ने विला की नीलामी की खबरों का खंडन किया है। किंगफिशर के मुताबिक बैंकों ने उनकी एयरलाइंस को ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है।

किंगफिशर जनवरी से कर्ज की किस्तें नहीं चुका पा रही है। उसने कुछ महीने पहले ही मुंबई के 'किंगफिशर हाउस' और गोवा के 'विला' को कर्ज देने वाले बैंकों को बेचने की पेशकश की थी। बैंकरों के मुताबिक, किंगफिशर के अंधेरी स्थिति किंगफिशर हाउस की बाजार कीमत 90 करोड़ रुपये और गोवा के विला की कीमत 30 करोड़ रुपये है।

किंगफिशर के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कर्मचारियों के हमारे नए दफ्तर द क्यूब (मुंबई) में चले जाने के कारण मुंबई का किंगफिशर हाउस खाली है। उसी समय अपने समझौते के मुताबिक हमने अपनी इस परिसंपत्ति को बेचने का प्रस्ताव किया था।

गुरुवार की बैठक में हमने ही इस मामले को उठाया। किंगफिशर ने दावा किया कि बैठक पहले से तय थी और इसमें हमें बैंकों को जानकारी देनी थी। इसमें सुधार प्रक्रिया शुरू करने के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। बैंकों ने नवंबर 2010 में कंपनी के कर्ज का पुनर्गठन किया था।

Sunday, 1 July 2012

फांसी से बचने के लिए सरबजीत ने कबूला इस्लामः सुरजीत.................

नई दिल्ली।। पाकिस्तान की जेल से 30 साल बाद छूटे सुरजीत सिंह ने खुलासा किया है कि लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद सरबजीत सिंह ने फांसी से बचने के लिए इस्लाम कबूल कर लिया है।

सुरजीत के मुताबिक सरबजीत ने अपना नाम बदलकर सरफराज़ रख लिया है। सुरजीत के मुताबिक फांसी की सजा पाए एक दूसरे भारतीय कैदी कृपाल सिंह भी धर्म बदल चुका है। उसने अपना नाम मोहम्मद दीन रखा है।

शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के इंफर्मेशन सेंटर में रिपोर्टर्स से बात करते हुए सुरजीत ने कहा, 'सरबजीत और कृपाल सिंह ने इस्लाम कबूल कर लिया है। उन्होंने फांसी की सजा माफ होने की उम्मीद में ऐसा किया है। लेकिन उन्हें माफी नहीं दी गई। पाकिस्तान के अधिकारी अपने लोगों को भी माफी नहीं देते हैं। '

उधर, सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने सरबजीत के इस्लाम कबूल करने की बात को गलत बताया है। उन्होंने कहा, 'यह सही नहीं है। सरबजीत गुरुसिख हैं और वह गुरुसिख ही रहेंगे। सरबजीत ने जेल में सिख गुरुओं की तस्वीरें और धार्मिक किताबें रखी हुई हैं। वह इन कितानों का रोज पाठ करते हैं।'

दलबीर ने कहा कि जब वह सरबजीत से मिलने पाकिस्तान की जेल में गई थीं, तो वह कृपाल सिंह को मुस्लिम नाम से पुकारा जा रहा था। लेकिन सरबजीत के बारे में यह सच नहीं है। दलबीर के मुताबिक पाकिस्तान के अधिकारी सरबजीत को सरबजीत या फिर मंजीत कहकर बुला रहे थे।

Thursday, 14 June 2012

क्या है राष्ट्रपति चुनाव का गणित?

राष्ट्रपति चुनाव की लड़ाई अपने निर्णायक मुकाम पर पहुंच चुकी है। रायसीना हिल पहुंचने के रास्ते में वही विजेता बनेगा, जिसे देश के सबसे अधिक विधायक और सांसदों का समर्थन हासिल होगा। इस बार वोटों की गणना इस कारण से अधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हो गई है क्योंकि किसी भी दल या घटक के पास अपने बूते राष्ट्रपति बनाने की ताकत नहीं है। ऐसे में समर्थन के लिए तमाम दलों को एक दूसरे की जरूरत पड़ेगी।

राष्ट्रपति चुनाव 2012 में कितने लोग वोटिंग करेंगे

लोकसभा सांसद - 543
राज्यसभा सांसद - 243
देश के कुल विधायक - 4,120
कुल वोटरों की संख्या - 4,896
कुल 4,120 विधायकों के वोटों की संख्या - 5,49,474
कुल 776 सांसदों के वोटों की संख्या- 5,49,408


एक विधायक की कीमत : किस राज्य में सबसे ज्यादा

उत्तर प्रदेश - 208
तमिलनाडु - 176
झारखंड - 176
महाराष्ट्र - 176
बिहार - 173
केरल - 152
प. बंगाल - 151
गुजरात - 147

जिन राज्यों में एक विधायक की कीमत 10 से कम
सिक्किम - 7
अरुणाचल प्रदेश - 8
मिजारेम - 8
नागालैंड - 8

दिल्ली के एक विधायक की कीमत - 58

सबसे अधिक वोट वाले राज्य

यूपी - 83,824
महाराष्ट्र - 50,400
प. बंगाल - 44,304

2007 में चुनाव नतीजे

प्रतिभा पाटिल को मिले थे वोट 6,38,116
भैरों सिंह शेखावत को मिले थे वोट 3,31,306

वोटों का कैसे होता है निर्धारण

राष्ट्रपति चुनाव में देश के सभी निर्वाचित सांसद और विधायक वोट देते हैं। सांसदों और विधायकों के वोटों की कीमत तय की जाती है।

कैसे होती है वोटों की कीमत तय?

उदाहरण के तौर पर -
आंध्र प्रदेश की कुल जनसं?या (1971 की जनगणना पर आधारित) - 4,35,02,708
वहां एक विधायक के वोट की कीमत निकालने के लिए आंध्र प्रदेश विधानसभा की जनसं?या को डिवाइड करेंगे कुल विधायकों की सं?या (294) से और इसे 1000 से गुणा करेंगे। इसका नतीजा निकलेगा 148।

एक एमपी के वोट की कीमत
एक एमपी के वोट की कीमत निकालने के लिए सभी राज्यों के विधायकों के वोट को जोड़कर उसे लोकसभा के निर्वाचित 543 और राज्यसभा के निर्वाचित 243 सदस्यों से डिवाइड किया जाता है।

चुनाव की कुछ खास बातें

- वोटिंग गुप्त बैलेट के जरिए होती है
- 1952 में एक एमपी के वोट की कीमत 49
- राष्ट्रपति पद के चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवारों को कम से कम 50 सांसद या विधायकों की ओर से अनुमोदन मिलना चाहिए। इसके लिए जमानत राशि 15 हजार रुपये की होती है।
- राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर होते हैं।

Tuesday, 12 June 2012

देश की आर्थिक दुर्दशा से मूर्ति और प्रेमजी हताश...........

बेंगलुरु।। विपक्षी पार्टियां और अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां के बाद देश के दिग्गज उद्योगपतियों ने भी यूपीए सरकार को आर्थिक कुप्रबंधन के लिए खुलेआम कोसना शुरू कर दिया है। भारतीय सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की शानदार कामयाबी से करीबी रूप से जुड़े दो लोगों ने यूपीए सरकार पर जमकर निशाना साधा। अजीम प्रेमजी और एन. आर. नारायणमूर्ति ने सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की आर्थिक संभावना को लेकर खतरा पैदा हो गया है।

मनमोहन सिंह सरकार पर की तल्ख टिप्पणी से कॉरपोरेट इंडिया के बीच सरकार की छवि का पता चलता है। आम तौर पर इस तरह की टिप्पणी सार्वजनिक रूप से देखने को नहीं मिलती है। देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक मूर्ति ने केंद्र की सरकार खासकर मनमोहन सिंह की तीखी आलोचना की है। उन्होंने मॉर्गन स्टैनली रिसर्च से कहा है कि 2004 से 2011 के दौरान भारत ने ज्यादा सुधार नहीं किए हैं।

11 जून की रिपोर्ट में मूर्ति के हवाले से कहा गया है, 'जब यह सरकार बनी थी तो काफी विश्वास था कि जो भी जरूरी होगा, भारत उसे करेगा क्योंकि जो व्यक्ति 1991 के आर्थिक सुधार का चेहरा था वह अभी हमारा प्रधानमंत्री है। इसलिए भारत से बाहर भी काफी उम्मीदे थीं। ऐसा लगता है कि पिछले 3-4 महीने में भारत की इमेज को जबर्दस्त धक्का पहुंचा है। एक भारतीय के रूप में मैं इस बात से बहुत दुखी हूं कि हम इस हालात में पहुंच गए हैं।'

पिछले कुछ महीनों से यूपीए सरकार पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वह बड़े फैसले लेने में बहुत ज्यादा डरती है। इस दौरान ग्रोथ और इनवेस्टमेंट की रफ्तार सुस्त हुई है, इनफ्लेशन और डेफिसिट बढ़ा है और रुपया कमजोर हुआ है। सरकार यह राग अलापती रही है कि जो भी उसके हाथ में है, वह कर रही है। सरकार ने मौजूदा स्थिति की वजह गठबंधन सरकार की मजबूरियों, क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों और यूरोपीय क्राइसिस जैसे कारकों को बताया है, जिस पर उसका नियंत्रण नहीं है।

उधर विप्रो के संस्थापक और चेयरमैन प्रेमजी ने सोमवार को मुंबई में कंपनी के एनालिस्ट मीट में कहा, 'बतौर देश हम लीडर के बगैर काम रहे हैं।' उन्होंने यह बात उस दिन कही, जिस दिन स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स ने कहा कि भारत इनवेस्टमेंट ग्रेड गंवाने वाला पहला ब्रिक्स देश बन सकता है। बैठक में शामिल होने वाले कम से कम 5 एनालिस्ट ने ईटी से उनके इस बयान की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि प्रेमजी ने यह भी कहा कि नीतिगत मामलों में सुस्ती किस तरह से इनवेस्टर सेंटीमेंट को खराब कर रही है। पिछले साल अजीम प्रेमजी और एचडीएफसी के दीपक पारेख जैसे 14 प्रमुख लोगों के समूह ने दो बार सरकार को पत्र लिखकर राजकाज के स्तर में सुधार करने की अपील की थी।

नोबेल पुरस्कार पर भी मंदी की मार....................

आर्थिक मंदी की मार दुनिया भर में नौकरियों पर ही नहीं पड़ रही है। इसकी वजह से दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान नोबेल पुरस्कार की इनामी राशि में भी 20% की कटौती की गई है। नोबेल फाउंडेशन ने एक बयान में कहा है कि साल 2012 के लिए पुरस्कार जीतने वालों को 80 लाख स्वीडिश क्रोनर यानी 11 लाख डॉलर मिलेंगे। वर्ष 2001 से अब तक पुरस्कार विजेताओं को 1 करोड़ क्रोनर (करीब 7.70 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि दी जा रही थी।

नोबेल फाउंडेशन ने एक बयान में कहा है कि बोर्ड आफ डायरेक्टर्स की 11 जून को हुई बैठक में वर्ष 2012 के लिए पुरस्कार राशि घटाने का फैसला लिया गया है। फाउंडेशन ने कहा कि कटौती के लिए आर्थिक संकट जिम्मेदार है। बयान में यह भी कहा गया है कि उसकी आय कम हुई है, जबकि खर्च बढ़े हैं।

स्टॉकहोम स्थित नोबेल फाउंडेशन मेडिसिन, भौतिकी, रसायन शास्त्र, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार देता है। नोबेल पुरस्कार के जनक अलफ्रेड नोबेल द्वारा छोड़ी गई वसीयत के पैसे में से ही यह पुरस्कार दिया जाता है।

फाउंडेशन के प्रमुख लार्स हीकेन्स्टेन ने बताया,'यह फैसला लेना हमारे लिए काफी कठिन था। बाजार में उथल-पुथल और संकट सबके सामने है और इसके अगले कुछ सालों तक बरकरार रहने की आशंका है।' उन्होंने कहा कि हमारे पास लंबे समय तक पूंजी की कमी न हो और आगे पुरस्कार देने में कोई दिक्कत नहीं आए, इसलिए यंह जरूरी कदम उठाया गया है।